श्री कसौंधन वैश्य समाज के चुनाव में चली जमकर धांधली, लगे आरोप
कई सदस्यों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर की हस्तक्षेप की मांग

सतना/ मैहर । गत दिवस श्री कसौधन वैश्य समाज सतना के चुनाव चल रहे थे तभी चुनाव का वातावरण टेंशनमयी नजर आ रहा था। लगता था निर्वाचन के समय हुए विवाद और उसके बाद आए परिणामों पर मामले का पटाक्षेप हो गया है पर जिस तरह से विरोध के स्वर उभरे हैंं वे किसी आंदोलन से कम नहीं दिखाई पड़ रहे हैं। ऐसा लगता है कि लोगों ने अपनी जाति के संगठनों पर विश्वास तो कर लिया पर उसकी कार्यशैली अब सामने आ रही है। कुल मिलाकर इस संगठन में दो गुट स्पष्ट नजर आ रहे हैं। यह गुटबाजी संगठन को किस दिशा पर ले जाएगी यह अलग बात है पर इस तरह की गतिविधियों से लोगों का विश्वास जातीय संगठनों से हट गया। एकता के बिंदु अब जंक् शन में बदल गए। अब हर समाज के संगठन के लोग भी जागरूक हो रहे हैं।
चार अक्टूबर को हुए थे चुनाव
कसौधन समाज के हुए वर्तमान चुनाव 04 अक्टूबर को हुए थे जिसके बारे में ज्ञापन सौंपने वाले समाज के लोगों ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की खुलेआम हत्या की गई है। इनका कहना है कि नियमानुसार वर्तमान समिति कार्यकाल 14 माह पूर्व समाप्त हो गया है। वर्तमान अवैध कार्यकारिणी को भंग किये बिना, समाज के वरिष्ठ संरक्षक गणों को विश्वास मे लिए बिना बायलाज में निहित नियमों को दरकिनार कर चुनाव प्रक्रिया प्रस्तावित की गई।
यह है मांग
चुनाव विसंगति संघर्ष समिति श्री कसौधन वैश्य समाज, सतना (समस्त सदस्यगण) का कहना है कि रजिस्ट्रार, फर्म्स एण्ड सोसायटी द्वारा उक्त अनियमित चुनाव प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। रजिस्टार, फम्र्स एण्ड सोसायटी को निर्देशित कर अधिकृत चुनाव अधिकारी की नियुक्ति कराई जाए। नई मतदाता सूची का प्रकाशन एवं नामांकन हेतु पर्यास समय प्रदान कर निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराया जाए। यदि 7 दिवस के भीतर कार्यवाही नहीं होती है तो चुनाव विसंगति संघर्ष समिति के बैनर तले धरना-प्रदर्शन किया जावेगा एवं उच्च न्यायालय की शरण लेने हेतु समिति के सदस्य बाध्य होंगे।
अनियमितताओंं का मार्केट
आरोप हंै कि मतदान के लिये छपवाये गए बैलेट पेपर मे सीरियल नम्बर नहीं डाले गए। बैलेट पेपर छापवाने की कुल कितनी संख्या रही उजागर नहीं की गई न हो लिखित जानकारी दी गई। बैलेट पेपर की बुकलेट मे मत पत्र अलग अलग पाए गए थे। बोटिंग मे किसी भी मतदाताओं से आई डी नहीं देखी। चुनाव अधिकारी द्वारा पोलिंग एजेंट नहीं बनाये गए। चुनाव अधिकारियों की टीम मे एक भी समाज के लोगो को नहीं रखा गया जो मतदाताओं को पहचान सके। मत पेटी से पड़े बोट से ज्यादा मत निकले। पुनर्र मतगणना का अनुरोध पत्र देने के बवजूद भी मतगणना नहीं कराई गईं। मतदान के दौरान हुई गड़बड़ी की शियकात क़ो चुनाव अधिकारी द्वारा किसी भी प्रकार सुनवाई नहीं की गई। पूरे मनमाने ढंग से सुनियोजित सांठगांठ से मतदान करवाया गया, प्रत्याशी चिल्लाते रहे बाहरी लोगों से मत डलवाते रहे चुनाव प्रबंधक समिति नादारत रही।
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